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‘Brother Bosch’, an Airman’s Escape From Germany – Gerald Featherstone Knight

A passage from the book… It was November 9th, 1916. I lay in a state of luxurious semi-consciousness pondering contentedly over things in general, transforming utter impossibilities into plausible possibilities, wondering lazily the while if I were asleep. Presently, to my disgust an indefinable, yet persistent something came into being, almost threatening to dispel the drowsy mist then pervading my brain. The slow thought waves gradually ceased their surging, and after a slight pause began to collect round the offending mystery, as if seeking to unravel it in a half-hearted sort of way. They gave me to understand that the something recurred at intervals, and even suggested that it might be a voice,[2] though from which side of the elastic dividing line it emanated they were quite unable to say.With the consoling thought that voices often come from dreamland I allowed the whole subject to glide gently into the void and the tide of thought to continue its drugged revolutions. The next instant a noisy whirlwind swept the cobwebs away. I knew that the voice was indeed a reality, for it delivered the following message: A very fine morning, sir! Obviously my dutiful servant desired me to rise and enjoy the full benefit of the beautiful day. Agreeing with Harry Lauder, that It’s nice to get up in the morning, but it’s nicer to stay in bed! I am sorry to say I cunningly dismissed the orderly with a few false assurances, turned over on my side and promptly forgot all about such trivial matters. Conscience was kicking very feebly, and just as sleep was about to return, the air commenced to vibrate and something swept overhead with a whirling roar

10 Years in the Ranks Us Army

This work has been selected by scholars as being culturally important, and is part of the knowledge base of civilization as we know it. This work was reproduced from the original artifact, and remains as true to the original work as possible. Therefore, you will see the original copyright references, library stamps (as most of these works have been housed in our most important libraries around the world), and other notations in the work.This work is in the public domain in the United States of America, and possibly other nations. Within the United States, you may freely copy and distribute this work, as no entity (individual or corporate) has a copyright on the body of the work.As a reproduction of a historical artifact, this work may contain missing or blurred pages, poor pictures, errant marks, etc. Scholars believe, and we concur, that this work is important enough to be preserved, reproduced, and made generally available to the public. We appreciate your support of the preservation process, and thank you for being an important part of keeping this knowledge alive and relevant.

1000 Itihas Prashnottari

वर्तमान युग में हर व्यक्‍त‌ि को जीवन के विभिन्न स्तरों पर अनेक प्रतियोगिताओं से गुजरना पड़ता है । राज्य स्तर पर और केंद्रीय स्तर पर विभिन्न महत्त्वपूर्ण संस्थानों के महत्त्वपूर्ण पदों के लिए ली जानेवाली प्रतियोगी परीक्षाओं में अन्य विषयों के साथ- साथ हिंदी भाषा और साहित्य से संबंधित वस्तुनिष्‍ठ प्रश्‍नों पर आधारित प्रश्‍न भी सम्मिलित होते हैं ।_x000D_
इस पुस्तक में 1000 प्रश्‍नों को अठारह महत्त्वपूर्ण अध्यायों – भाषा, हिंदी साहित्य का इतिहास, कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध- आलोचना, रेखाचित्र- संस्मरण, आत्मकथा-जीवनी, यात्रा साहित्य, रिपोर्ताज, साक्षात्कार और पत्र साहित्य, काव्य शास्त्र, साहित्यिक पत्रकारिता, संस्थाएँ पुरस्कार, चित्रावली तथा विविध-में बाँटा गया है । प्रत्येक प्रश्‍न के लिए अध्याय का निर्धारण पाठकों की सुविधा के लिए किया गया है ।_x000D_
समय की माँग और समय की कमी के कारण साहित्य के विराट‍् फलक में प्रवेश कर उसे आत्मसात् करने का अवसर बहुतों के पास नहीं है । यह पुस्तक बहुत सुगमता से ऐसे व्यक्‍त‌ियों को हिंदी साहित्य के महत्त्वपूर्ण बिंदुओं और वस्तुनिष्‍ठ तथ्यों से परिचित कराने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है ।_x000D_
पुस्तक में हिंदी साहित्य के व्यापक परिदृश्य पर फैले केंद्रीय और महत्त्वपूर्ण प्रश्‍नों को समेटने की कोशिश की गई है । भाषा संबंधी प्रश्‍नों के साथ-साथ हिंदी साहित्य का इतिहास, काव्य शास्त्र, साहित्यिक संस्थाओं, पुरस्कारों से संबंधित प्रश्‍न इसमें सम्मिलित हैं ।कुछ महत्त्वपूर्ण रचनाकारो की चित्रावली भी इसमें समाविष्‍ट है । यह पुस्तक अपने आपमें हिंदी साहित्य का इतिहास है ।

1000 Mythological Characters Briefly Described

Adapted to Private Schools, High Schools and Academies

1000 Samjashastra Prashnottari

कृष्ण विचलित नहीं हुए । अपने खुद के वचन की यथार्थता मानो सहजभाव से प्रकट होती है । नाश तो सहज कर्म है । यादव तो अति समर्थ है; फिर कृष्ण- बलराम जैसे प्रचंड व्यक्‍त‌ियों से रक्षित हैं- उनका सहज नाश किस प्रकार हो? उनका नाश कोई बाह्य शक्‍त‌ि तो कर ही नहीं सकती । कृष्ण इस सत्य को समझते हैं और इसलिए माता गांधारी के शाप के समय केवल कृष्ण हँसते हैं । हँसकर कहते हैं – ‘ माता! आपका शाप आशीर्वाद मानकर स्वीकार करता हूँ; कारण, यादवों का सामर्थ्य उनका अपना नाश करे, यही योग्य है । उनको दूसरा कोई परास्त नहीं कर सकता । ‘ कृष्ण का यह दर्शन यादव परिवार के नाश की घटना के समय देखने योग्य है । अति सामर्थ्य विवेक का त्याग कर देता है और विवेकहीन मनुष्य को जो कालभाव सहज रीति से प्राप्‍त न हो, तो जो परिणाम आए वही तो खरी दुर्गति है । कृष्ण इस शाप को आशीर्वाद मानकर स्वीकार करते हैं । इसमें ही रहस्य समाया हुआ है ।_x000D_
-इसी पुस्तक से_x000D_
न केवल भारतीय साहित्य में अपितु समग्र विश्‍व साहित्य में श्रीकृष्ण जैसा अनूठा व्यक्‍त‌ित्व कहीं पर उपलब्ध नहीं है । संसार में लोकोत्तर प्रतिभाएँ अगण्य हैं; परंतु पूर्ण पुरुषोत्तम तो श्रीकृष्ण के अलावा अन्य कोई नहीं है । श्रीकृष्ण के किसी निश्‍च‌ित रूप का दर्शन करना असंभव है । बाल कृष्ण से लेकर योगेश्‍वर कृष्ण तक इनके विभिन्न स्वरूप हैं । प्रस्तुत पुस्तक में श्रीकृष्ण के चरित्र को बौद्धिक स्तर से समझने का प्रयास किया गया है ।_x000D_
वि‍श्‍वास है, पाठकों को यह प्रयास पसंद आएगा ।

1000 Sangh Prashnottari

विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उपस्थिति समाज के लगभग हर क्षेत्र में अनुभव की जा सकती है।_x000D_
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में चाहे किसी भी विरोधी या आलोचक ने कुछ भी आरोप क्यों न लगाया हो, कुछ भी कहा हो; परंतु जब भी अपने देशवासियों पर विपत्ति आई है, संघ के स्वयंसेवकों ने सदा जनता की सेवा की है और उसके बदले में कभी किसी चीज की अपेक्षा नहीं की। संघ के कार्यकर्ताओं (स्वयंसेवकों) ने देशभक्ति एवं निस्स्वार्थ सेवा का आदर्श प्रस्तुत किया है, जिसके चलते सर्वोदय नेता श्री प्रभाकर राव ने आर.एस.एस. को ‘रेडी फॉर सेल्फलेस सर्विस’ (निस्स्वार्थ सेवा के लिए तत्पर) का नया नाम दिया।_x000D_
प्रस्तुत पुस्तक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंधित समस्त जानकारी (तथ्यों की) वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के रूप में दी गई है। पुस्तक को तैयार करते समय संघ से संबंधित उन सभी महत्त्वपूर्ण विषयों को सम्मिलित करने का प्रयास किया गया है, जिसके बारे में आमतौर पर कम जानकारी उपलब्ध है। प्रस्तुत पुस्तक में संघ का प्रादुर्भाव, प्रार्थना, भगवा ध्वज (गुरु), शाखा, संघ शिक्षा वर्ग, संघ की भौगोलिक रचना, गणवेश, खेल, उत्सव, साहित्य, संपूर्ण संघ परिवार, संघ से जुड़ी संस्थाएँ, संघ के सभी सरसंघचालक, संघ के प्रमुख व्यक्तित्व जैसे सर्वश्री दीनदयाल उपाध्याय, नानाजी देशमुख, दत्तोपंत ठेंगड़ी आदि संघ द्वारा की गई समाज-सेवा आदि से संबंधित एक हजार प्रश्न दिए गए हैं।_x000D_
आशा है यह पुस्तक संघ के विषय में अधिकाधिक जानने के जिज्ञासु पाठकों का ज्ञानवर्धन करके उन्हें राष्ट्र-निर्माण में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी।

1000 Things Worth Knowing

This book contains more than one thousand facts, many of which are not generally known to the average person; but all of them are of interest to humankind, and a knowledge of many of them is essential.

1000 Things Worth Knowing

Part almanac, part encyclopedia, part dictionary, Nathaniel C. Fowler, Jr. gives us his idea of important, but sometimes obscure, facts that he thinks should be in our bank of general knowledge. He includes a large section on medical emergency and health.

1000 Uttar Pradesh Prashnottari

1000 उत्तर प्रदेश प्रश्‍नोत्तरी_x000D_
उत्तर प्रदेश भारत का सबसे घनी आबादीवाला प्रदेश है। राजधानी लखनऊ एक ऐतिहासिक नगर होने के साथ-साथ नवाबी तहजीब के लिए प्रसिद्ध है। यह देश के उत्तरी भाग में स्थित है। स्वतंत्रता की लड़ाई में इसका महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। यह अनेक राष्‍ट्रभक्‍तों की जन्म-स्थली एवं कर्म-स्थली रहा है। देश को सर्वाधिक सांसद एवं प्रधानमंत्री देने का गौरव इसको प्राप्‍त है।_x000D_
यहाँ विभिन्न जाति व संप्रदाय के लोग रहते हैं। यहाँ की इतनी विविध और महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ हैं, जिनका दुनिया में कोई शानी नहीं; जैसे—खुर्जा का पॉटरी उद्योग, बनारस की साड़ियाँ, फिरोजाबाद का चूड़ी उद्योग, इलाहाबाद का कुंभ, दुनिया का सातवाँ अजूबा विश्‍व-प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल यहीं स्थित है।_x000D_
उत्तर प्रदेश की संपूर्ण जानकारी को 1,000 प्रश्‍नों में समेट पाना दुष्कर कार्य है। फिर भी शिक्षा, उद्योग, संस्कृति, हस्तशिल्प, पर्यटन, लोक-परंपराएँ, दर्शनीय स्थल, ऐतिहासिक महत्त्व आदि की जानकारी को सार रूप में प्रश्‍नोत्तर शैली में प्रस्तुत किया गया है।_x000D_
आज बढ़ती प्रतियोगिता के वातावरण में ऐसी पुस्तकों की लोकप्रियता बढ़ रही है। विद्यार्थियों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं महत्त्वपूर्ण पुस्तक।

1000 Vaastushastra Prashnottari

बच्चों का मस्तिष्क कोरी स्लेट की तरह होता है। यह कहानियाँ उन बच्चों को लक्ष्य पर लिखी गयी हैं, जो अबोध आयु को पार कर किशोरावस्था में प्रवेश कर रहे है। प्रस्त्तुत संकलन में संकलित कहानियाँ मानवीय स्वभाव के सदगुणों-अवगुणों और भावनाओं, जैसे – ईर्ष्या, छल, दूसरों की सहायता, कंजूसी आदि पर आधारित है।

1000 Vishwa Prashnottari

मानव जीवन का आरंभ सवालों से हुआ है। ब्रह्मांड की रचना कैसे हुई? सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी और तारे अस्तित्व में कैसे आए? दिनरात कैसे होते हैं? महासागर, महाद्वीप, देश, दुनिया, आविष्कार, जीवजंतु जगत् इत्यादि के प्रति लोगों के मन में सदैव तरहतरह के सवाल कौंधते रहते हैं। अगर हमारे मन में सवाल नहीं उठते तो आप व हम यह नहीं जान पाते कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है या सूर्य पृथ्वी के चारों ओर घूमता है। दरअसल, सवाल ही हमारे दिमाग को विकसित करते हैं। सवाल ही हमारे दिमाग की खुराक है। बच्चा जब पैदा होता है, वह अबोध होता है। बढ़ने के समय उसके मन में सवाल उठते हैं और उनके जवाब से उसका दिमाग विकसित होता है। अविकसित दिमाग मांस का एक लोथड़ा भर होता है। दिमाग के विकास के लिए सवाल करना और उनका जवाब पाना बेहद जरूरी है। जेम्स वॉट की सवाल करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति ने ही उन्हें ‘महान् वैज्ञानिक’ बनाया।_x000D_
सवाल दरअसल वह बीज हैं, जो मानव मस्तिष्क को वट वृक्ष सरीखा विशाल बना सकते हैं। हम जितना ज्यादा सवाल करेंगे, उतना ही हमारा मस्तिष्क समृद्ध होगा।_x000D_
‘1000 विश्व प्रश्नोत्तरी’ पुस्तक एक ऐसा वृहत् संकलन है, जो न केवल सवालों के प्रति आपकी जिज्ञासा बढ़ाता है, बल्कि उनके जवाब भी देता है और इस प्रकार मस्तिष्क विकास का एक सरलसहज माध्यम उपलब्ध कराता है। याद रखें, अगर आपके पास सभी जवाब हैं तो आप निश्चित रूप से सफल हैं।

101 Great Personalities Who Change the World

Many take birth in this world and leave without leaving a mark. It is the ones who have left footprints on the sands of time that are remembered. They are the great people who have achieved something and inspired thousands. They are the people who have strived and contributed to the world and society at large._x000D_
This book is the saga of such hundred and one personalities and highlights their contribution in their respective fields. It throws light on the achievements of those who had the courage to follow their own heart and convictions, even when opposed. Their revolutionary ideas brought a change and shaped the course of history.

101 Hastiyan, Jinhonne Duniya Badal Di

मानव सभ्यता के इतिहास का निर्माण कुछ ऐसे असाधारण व्यक्तियों ने किया है, जो मानव जाति की स्मृतियों में सदा-सदा के लिए अमर हो गए हैं। ऐसी असाधारण हस्तियों के बगैर हम एक विकसित दुनिया की कल्पना नहीं कर सकते। संसार के ऐसे विशिष्ट व्यक्तियों की कोई सूची नहीं बनाई जा सकती। प्राचीनकाल से ही इस धरती पर ऐसे कर्मठ और पुरुषार्थी व्यक्तियों का जन्म होता रहा है, जो अपने जीवन और कर्म के जरिए संसार को बदलने में निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। इस पुस्तक में ऐसी ही 101 चुनी हुई हस्तियों की जीवनी प्रस्तुत की गई है।_x000D_
इन 101 हस्तियों में अलग-अलग श्रेणियों, यानी दर्शन, राजनीति, आविष्कार और संस्कृति आदि सभी क्षेत्रों के लोग शामिल हैं।_x000D_
इस पुस्तक के माध्यम से पाठकों को मानव जाति के इतिहास की यात्रा करने का अवसर मिलेगा कि किस तरह मानव जाति के धार्मिक एवं दार्शनिक विकास के जरिए उसकी राजनीतिक प्रगति संभव हुई और फिर किस तरह मनुष्य की सृजन क्षमता और उद्यमशीलता का विकास संभव हो पाया।