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365 Din Khush Kaise Rahe by M.K. Mazumdar

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चेहरे पर हँसी और मुसकान को देखकर खुशी को परिभाषित नहीं किया जा सकता है। खुशी चेहरे पर नहीं, अंतर की गहराई में होती है, जो चेहरे पर झलके, यह जरूरी नहीं है। वैसे खुश रहने का कोई फॉर्मूला नहीं होता। लोग अपने आप में खुश रहते हैं। किसे किस बात में खुशी मिलेगी, यह कहा नहीं जा सकता। वे खुद भी सहीसही नहीं बता सकते हैं कि उन्हें किस बात में खुशी मिलेगी। हर कोई अपने आप में खुश रहता है या अपने आप में दुःखी रहता है। खुश रहने का लोगों का अपनाअपना सिद्धांत है, अपनाअपना तरीका है, अपनाअपना विचार है।
निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि खुश रहना अपने हाथ में है। किसी को बड़ी उपलब्धि पर खुशी मिलती है तो किसी को छोटी उपलब्धि पर बड़ी खुशी मिलती है। कोई छोटी बात पर बहुत खुश हो जाता है, कोई बड़ी बात पर भी खुश नहीं हो पाता है। यानी जो जिस बात में अधिक खुशी ढूँढ़ता है, वह उतना ही अधिक खुश होता है। जो कम खुशी ढूँढ़ता है, वह कम खुश रहता है।
प्रस्तुत पुस्तक में यही बताया गया है कि खुशियाँ दिखाई नहीं देतीं, महसूस की जाती हैं। खुशियाँ हमारे आसपास ही बिखरी पड़ी हैं। बस, उन्हें समेटने की जरूरत है, सुनहरे पलों में कैद करने की जरूरत है। हम अगर छोटेछोटे पहलुओं में खुशियाँ ढूँढ़ें तो हमारे पास दुःख नाम की चीज नहीं रह जाएगी।

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ISBN

9789384343323.pdf

Publication Author

MK MAZUMDAR

Publisher Name

Prabhat Prakashan

Publication Language

Hindi

Publication Mode

Online, Print

Publication Type

eBooks, Print Book (Hard Bound)

Published Year

2019

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